← मुख्य पृष्ठ

॥ शुक्र चालीसा ॥

Shukra Chalisa

॥ दोहा ॥

श्वेत वर्ण श्वेत वस्त्र धर, शुक्र देव भगवान।

दैत्य गुरु सौंदर्य निधि, करो कृपा का दान॥


भृगु नंदन शुक्राचार्य, असुर गुरु गुणवान।

संजीवनी विद्या धरो, करहु भक्त कल्याण॥

॥ चौपाई ॥

जय जय शुक्र दैत्य गुरु स्वामी।

सौंदर्य निधि अंतर्यामी॥

भृगु ऋषि के तुम पुत्र कहाये।

दिव्य तेज से जग में छाये॥

माता का नाम कव्या सुहाये।

पुलोमा नाम भी जग में गाये॥

श्वेत वर्ण अति कांति निराली।

श्वेत वस्त्र श्वेत पुष्प माली॥

चतुर्भुज रूप मनोहर धारी।

दण्ड जप माला पुस्तक भारी॥

वरद मुद्रा भक्तन हितकारी।

कमल आसन पर शोभा न्यारी॥

श्वेत अश्व वाहन तुम्हारा।

दिव्य रथ पर विराजत न्यारा॥

दैत्यों के तुम गुरु महान।

संजीवनी विद्या के निधान॥

मृत संजीवनी मंत्र धरो तुम।

मरे हुए को जीवित करो तुम॥

शिव जी से विद्या यह पायी।

घोर तपस्या कर मन भायी॥

वृषभ तुला राशि के स्वामी।

सौंदर्य प्रेम के अंतर्यामी॥

मीन में उच्च कन्या में नीच।

ज्योतिष शास्त्र यही है सीच॥

शुक्रवार के तुम स्वामी देवा।

इस दिन करें सब तव सेवा॥

हीरा रत्न तुम्हारा प्यारा।

चांदी धातु शुभ अति न्यारा॥

श्वेत वस्त्र श्वेत पुष्प चढ़ाओ।

खीर मिष्ठान भोग लगाओ॥

चावल खांड दही अति भावे।

श्वेत वस्तु से शुक्र रिझावे॥

सौंदर्य कला के दाता स्वामी।

कला संगीत के अंतर्यामी॥

प्रेम विवाह सुख के अधिकारी।

दांपत्य जीवन के हितकारी॥

शुक्र दोष जो कुंडली में होवे।

शुक्रवार व्रत से शांत होवे॥

विवाह में जो विलंब हो रहा।

शुक्र पूजन से बने सुखदा॥

दांपत्य जीवन में कलह होवे।

शुक्र कृपा से प्रेम जागे॥

सौंदर्य हीन जो कोई जाने।

शुक्र आराधन से रूप माने॥

कला संगीत में उन्नति चाहे।

शुक्र कृपा से सब कुछ पाये॥

नृत्य अभिनय में जो बढ़ना चाहे।

शुक्रदेव आशीष से पाये॥

फैशन ग्लैमर की दुनिया में।

शुक्र कृपा से चमके जिया में॥

वाहन सुख की चाह मनावे।

शुक्र पूजन से वाहन पावे॥

भोग विलास ऐश्वर्य बढ़ावे।

शुक्र देव से सुख सब पावे॥

धन संपत्ति की वृद्धि होवे।

शुक्र कृपा से निर्धन न होवे॥

गृहस्थ जीवन सुखमय बनावे।

शुक्रदेव आशीष से पावे॥

पत्नी सुख की कामना करे जो।

शुक्र पूजन से पूर्ण करे सो॥

मधुमेह वीर्य रोग में लाभ।

शुक्र कृपा से मिले स्वास्थ्य आभ॥

नेत्र रोग में भी सुख पावे।

शुक्र पूजन से आंख स्वस्थ आवे॥

प्रजनन तंत्र की समस्या होवे।

शुक्र कृपा से ठीक होवे॥

शुक्रवार को व्रत धारण करिये।

श्वेत वस्त्र धारण करिये॥

लक्ष्मी माता की पूजा करिये।

श्वेत पुष्प चावल अर्पण करिये॥

ॐ शुं शुक्राय नमः जपिये।

शुक्र कृपा का फल पाइये॥

हीरा या ओपल धारण करो।

चांदी में जड़वा अनामिका धरो॥

गाय को चारा खिलाओ नित।

श्वेत वस्तु दान दो हित॥

कन्या दान महादान कहाये।

शुक्र कृपा से पुण्य कमाये॥

शुक्र चालीसा जो नित गावे।

सौंदर्य प्रेम सुख संपत्ति पावे॥

जय जय शुक्र देव भगवान।

करो कृपा दो शुभ वरदान॥

॥ दोहा ॥

शुक्र चालीसा पढ़े जो कोय।

सौंदर्य प्रेम धन सुख होय॥

विवाह सुख दांपत्य बढ़े।

शुक्र कृपा से जीवन चढ़े॥


॥ ॐ शुं शुक्राय नमः ॥


॥ इति श्री शुक्र चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री शुक्र चालीसा के लाभ ॥

॥ शुक्र उपासना विधि ॥

॥ शुक्र मंत्र ॥

॥ शुक्र ग्रह जानकारी ॥