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॥ श्री संतोषी माता आरती ॥

Shri Santoshi Mata Aarti

॥ आरती - १ ॥

जय संतोषी माता

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।

सन्तोष देत सबको, सुख की खान, जय संतोषी माता॥

जय संतोषी माता॥

जो भी ध्यावे तुमको, फल वो पाता है।

मन के सब मनोरथ, पूर्ण हो जाते हैं॥

जय संतोषी माता॥

गुड़ चने का भोग माता, तुमको भाता है।

शुक्रवार को पूजन, फल वरदाता है॥

जय संतोषी माता॥

धूप दीप फल मेवा, माता स्वीकार करे।

भक्तों का कल्याण हो, संकट टल जाए॥

जय संतोषी माता॥

व्रत सोलह शुक्रवार का, जो कोई करता है।

मन वांछित फल उसको, तुरंत मिल जाता है॥

जय संतोषी माता॥

निर्धन को धन देती, निर्बल को बल देती।

सुखहीन को सुख देती, माता दुःख हरती है॥

जय संतोषी माता॥

गणेश जननी है माता, गणनायक की प्यारी।

रिद्धि सिद्धि की बहना, सुख संपत्ति दात्री॥

जय संतोषी माता॥

संतोषी माता की आरती, जो कोई गावे।

सुख संपत्ति मनचाहा, सब कुछ वो पावे॥

जय संतोषी माता॥

॥ आरती - २ ॥

सुख की सागर माता

सुख की सागर माता, संतोषी जग माता।

आयी शरण में तेरी, कृपा करो अविनाशी॥

जय जय संतोषी माता॥

शुक्रवार का व्रत करें, गुड़ चना चढ़ाएं।

सोलह शुक्रवार व्रत से, मनवांछित फल पाएं॥

जय जय संतोषी माता॥

दीन दुखियों की रक्षा, करती माँ भवानी।

भक्त वत्सला माता, पूर्ण करे मनकामना॥

जय जय संतोषी माता॥

खट्टा त्याग करें भक्त, मीठे भोजन खायें।

मन में श्रद्धा भाव से, माँ की कथा सुनायें॥

जय जय संतोषी माता॥

जो भी शरण में आवे, खाली नहीं जाता।

माता के चरणों में, सुख शान्ति पाता॥

जय जय संतोषी माता॥

॥ आरती - ३ ॥

मैया संतोषी तेरी शरण आये

मैया संतोषी तेरी शरण आये हम।

दुःख दर्द मिटा दो, सुख शान्ति दे दो॥

तू ही एक सहारा, तेरा आसरा माँ।

चरणों में झुक आये, कृपा करो महारानी॥

जय संतोषी जय संतोषी, जय जय माँ॥

गणेश लाल की बहना, रिद्धि सिद्धि की साथी।

भक्तों का कल्याण करती, कष्ट हरण करती माँ॥

जय संतोषी जय संतोषी, जय जय माँ॥

आरती तेरी गाते हैं, भक्त तेरे प्यारे।

गुड़ चने का भोग लगा, मन्नत पूर्ण करो माँ॥

जय संतोषी जय संतोषी, जय जय माँ॥

॥ आरती - ४ ॥

करो कृपा हे माता

करो कृपा हे माता, संतोषी जग दाता।

सुख समृद्धि दो सबको, भक्ति भाव बढ़ाओ॥

मंगल भवन अमंगल हारी, द्रविडा सिद्धु मातु।

सुख सम्पत्ति की दाता, कष्ट हरण माई॥

जय जय जय संतोषी माता॥

जो मन लगा के ध्याए, उसकी आस पुरावे।

सुन्दर मूरत माता की, मन को मोह लेती है॥

जय जय जय संतोषी माता॥

श्रद्धा भक्ति से जो पूजे, मन की मुराद पावे।

घर में सुख शांति आवे, धन धान्य से भरपूर॥

जय जय जय संतोषी माता॥

॥ संतोषी माता मंत्र ॥

ॐ श्री संतोषी माता नमः

ॐ श्री संतोषी माता नमः॥

ॐ सन्तोषी माँ सुख दात्री नमः॥

संतोष धर्म की मूर्ति माता,

सुख शान्ति की देवी माँ।

तुम्हारी शरण में आये हम,

कृपा करो जगदम्बे माँ॥

या देवी सर्वभूतेषु, शांति रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः॥

॥ समापन प्रार्थना ॥

जय संतोषी माता की जय।

संतोष धर्म की मूर्ति की जय॥

सुख शांति दायिनी की जय।

भक्त वत्सला माता की जय॥


॥ ॐ श्री संतोषी माता की जय ॥


॥ इति श्री संतोषी माता आरती संपूर्ण ॥

॥ श्री संतोषी माता आरती के लाभ ॥

॥ संतोषी माता आरती विधि ॥

॥ प्रमुख संतोषी माता मंत्र ॥

॥ माता संतोषी की विशेषताएं ॥

॥ सोलह शुक्रवार व्रत विधि ॥

॥ आरती का उत्तम समय ॥

॥ संतोषी माता पूजन सामग्री ॥

॥ व्रत में वर्जित वस्तुएं ॥

॥ व्रत में ग्रहण योग्य भोजन ॥

॥ संतोषी माता कथा का सार ॥

॥ उद्यापन विधि (17वां शुक्रवार) ॥

॥ संतोषी माता मंदिर ॥

॥ व्रत के लाभ ॥

॥ संतोष धर्म का महत्व ॥

॥ व्रत कथा सुनने का महत्व ॥