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॥ संतोषी माता चालीसा ॥

Santoshi Mata Chalisa

॥ दोहा ॥

जय संतोषी माता जय, गणपति की सुत धाम।

सुख संपत्ति दायिनी, पूर्ण करो सब काम॥

॥ चौपाई ॥

जय संतोषी माता भवानी।

जय गणेश सुता सुखदानी॥

जय जय संतोषी जग तारिणी।

भक्तन की दुख हरने वारिणी॥

गणपति नंदिनी तुम कहलाओ।

रिद्धि सिद्धि माता से पाओ॥

शुभ लाभ तुम्हारे भाई प्यारे।

गणेश परिवार में सब न्यारे॥

लाल वस्त्र धारण करो माता।

स्वर्ण आभूषण शोभा पाता॥

कमल नयन मुख अति सुहावे।

दर्शन करत मन हरषावे॥

करो में तलवार विराजे।

त्रिशूल कमल भी कर साजे॥

सिंह वाहन पर सवार सोहे।

भक्तन का मन सदा मोहे॥

शुक्रवार को व्रत जो करते।

संतोषी माता कृपा बरसते॥

सोलह शुक्रवार व्रत धारी।

मनोकामना पूर्ण करे भारी॥

गुड़ चना प्रसाद चढ़ाओ।

माता को भोग लगाओ॥

खट्टा भोजन व्रत में त्यागो।

नियम धर्म से व्रत में जागो॥

कथा सुनो व्रत के दिन रानी।

पूजन करो विधि विधानी॥

संतोष से भरपूर करो माँ।

लोभ लालच को दूर करो माँ॥

जो जन तुमको मन से पूजे।

उसकी बिगड़ी बात न बूझे॥

घर में सुख शांति बनाओ।

कलह क्लेश सब दूर भगाओ॥

पति पत्नी में प्रेम बढ़ाओ।

सास बहू में स्नेह जगाओ॥

परिवार में मेल कराओ।

सुख समृद्धि घर में लाओ॥

धन धान्य की कमी न होवे।

माता कृपा से सब कुछ होवे॥

संतान सुख की कामना पूरी।

माता करे सब इच्छा पूरी॥

कन्या का वर योग्य मिलावे।

शुभ विवाह माता करावे॥

पुत्र वधू सुशील मिलाओ।

गृहस्थी में सुख बरसाओ॥

नौकरी व्यापार में उन्नति।

माता कृपा से होती गति॥

परीक्षा में सफलता दिलाओ।

विद्या बुद्धि मन में जगाओ॥

रोग व्याधि से मुक्ति दिलाओ।

निरोगी तन हमें बनाओ॥

शत्रुओं से रक्षा करो माता।

विघ्न विनाशन करो विधाता॥

कोर्ट कचहरी से छुटकारा।

माता करे संकट निवारा॥

ऋण से मुक्ति दिलाओ माई।

आर्थिक संकट से बचाई॥

मन में संतोष का भाव जगाओ।

ईर्ष्या द्वेष को दूर भगाओ॥

जो कुछ मिले उसी में खुश रहूं।

संतोषी मन से जीवन कहूं॥

तृष्णा लोभ से मुक्त कराओ।

सादा जीवन का पाठ पढ़ाओ॥

दान पुण्य में रुचि जगाओ।

परोपकार का भाव सिखाओ॥

भक्ति भाव में मन लगाओ।

ईश्वर चरणों में ध्यान लगाओ॥

सत्य मार्ग पर हमें चलाओ।

धर्म कर्म का ज्ञान सिखाओ॥

जो भक्त तुम्हें श्रद्धा से पूजे।

उसकी कोई मनोकामना न छूटे॥

व्रत नियम से जो जन करते।

सो सब सुख सम्पदा भरते॥

संतोषी माता की जय बोलो।

मन में श्रद्धा भक्ति घोलो॥

संतोषी चालीसा जो गावे।

मनवांछित फल शीघ्र ही पावे॥

सुख शांति संतोष मन पावे।

घर परिवार में खुशियां छावे॥

जय जय संतोषी माता भवानी।

जय जय गणेश दुलारी रानी॥

॥ दोहा ॥

संतोषी चालीसा पढ़े जो कोय।

सुख शांति संतोष मन होय॥

मनोकामना सब पूर्ण हो जावे।

संतोषी माता कृपा छा जावे॥


॥ जय संतोषी माता की जय ॥


॥ इति श्री संतोषी माता चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री संतोषी माता चालीसा के लाभ ॥

॥ व्रत विधि ॥