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॥ साईं बाबा चालीसा ॥

Sai Baba Chalisa

॥ दोहा ॥

प्रथम साईं को नमन कर, मांगूं सबकी खैर।

श्रद्धा सबुरी देह मोहे, साईं राखो पैर॥


शिरडी माझे पंढरपुर, साईं बाबा रामा।

बाबा साईं पंढरपुर, सब मिला है धामा॥

॥ चौपाई ॥

जय जय साईं जय जग त्राता।

सुंदर वेश मनोहर गाता॥

शिरडी नगर विराजे साईं।

दर्शन करत कटे दुख भाई॥

कफनी धारे सिर पे टोपी।

सोहत साईं सबसे गोपी॥

धूनी जलावे द्वारकामाई।

उदी बांटत सबको भाई॥

भक्तन की रक्षा को धावे।

संकट काटे दर्श दिलावे॥

सबका मालिक एक कहावे।

हिंदू मुस्लिम सबको भावे॥

श्रद्धा सबुरी महिमा न्यारी।

इन दो शब्दों में जग तारी॥

अल्लाह मालिक सत्य वचन।

भक्तों का सब करे पालन॥

सोलह सौ साठ में आये।

नीम तरु तले बैठ ध्याये॥

तीन वर्ष की अल्प आयु।

शिरडी ग्राम किया प्रवेश साधु॥

म्हालसापति ने पहचाना।

आओ साईं बोले सुजाना॥

तभी से साईं नाम कहाये।

शिरडी में प्रभु आसन जमाये॥

लेंडी बाग में करे साधना।

भक्तों के दुख करे विमोचना॥

चावड़ी में करे विश्राम।

भक्त करे सेवा प्रणाम॥

जलते दीप उठाये हाथ।

चमत्कार किये बहु साथ॥

जल को तेल किया बनाई।

दीपक जलाये महिमा गाई॥

रोगी जन को आरोग्य देते।

उदी प्रसाद से सुख हर लेते॥

नानासाहेब चांदोरकर।

दासगणू माधवराव सुंदर॥

हेमाडपंत अब्दुल बाबा।

महान भक्त थे सब बाबा॥

साईं सत्चरित्र अमृत धारा।

पढ़त सुनत सुख मिले अपारा॥

गुरुवार को व्रत जो राखे।

साईं कृपा से सब सुख पाखे॥

प्रातः स्नान करे जो कोई।

मंदिर जाये पूजा होई॥

फूल चढ़ाये प्रसाद अर्पण।

साईं करे सबका तर्पण॥

धूप दीप नैवेद्य सजाये।

आरती गाये मन में ध्याये॥

निर्धन को धन मिले अपारा।

साईं करे भक्तों का उद्धारा॥

संतान हीन को पुत्र मिलावे।

साईं कृपा से जीवन चमकावे॥

रोजगार नौकरी में कष्ट।

साईं भजन से मिटे सब अरिष्ट॥

विवाह योग्य कन्या कुमार।

साईं कृपा से बने संसार॥

मुकदमा अदालत की पीड़ा।

साईं स्मरण से कटे सब बाधा॥

भूत प्रेत बाधा जो होवे।

साईं नाम से सब दूर होवे॥

ग्रह दोष शांत करावे साईं।

सब विपत्ति से बचावे भाई॥

अक्टूबर सन् अठारह सौ अठारा।

विजयादशमी दिन गए न्यारा॥

समाधि मंदिर में विराजे साईं।

आज भी देते दर्शन भाई॥

जीवित रूप में आज भी आते।

भक्तों के सपने में दर्शन पाते॥

शिरडी संस्थान भव्य बनाया।

लाखों भक्त आते दर्शन पाया॥

काकड़ आरती प्रातः होवे।

मध्याह्न आरती दुपहर होवे॥

धूप आरती संध्या काल।

शेज आरती रात्रि विशाल॥

चार आरती नित्य होय जो।

साईं कृपा पूर्ण होय सो॥

ग्यारह वचन साईं ने दीने।

भक्तों के मन आनंद कीने॥

साईं चालीसा जो नित गावे।

सर्व सुख संपत्ति पावे॥

जय जय साईं बाबा भगवान।

करो कृपा दो शुभ वरदान॥

॥ दोहा ॥

साईं चालीसा पढ़े जो कोय।

मनवांछित फल पावे सोय॥

श्रद्धा सबुरी मन में धारे।

साईं बाबा सबको तारे॥


॥ ॐ साईं राम ॥


॥ इति श्री साईं बाबा चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री साईं बाबा चालीसा के लाभ ॥

॥ साईं बाबा के ग्यारह वचन ॥

॥ साईं बाबा उपासना विधि ॥

॥ साईं बाबा मंत्र ॥

॥ साईं बाबा जानकारी ॥

॥ शिरडी साईं मंदिर में आरती समय ॥

॥ साईं बाबा के प्रमुख भक्त ॥