॥ दोहा ॥
पितृ देव को प्रणाम कर, मांगूं उनका आशीष।
कृपा करो हे पूर्वजों, पूर्ण करो जगदीश॥
श्राद्ध तर्पण पिंडदान से, पितृ होवें प्रसन्न।
वंश वृद्धि सुख संपदा, मिटे सकल दुख भिन्न॥
॥ चौपाई ॥
जय जय पितृ देव गुणखानी।
पूर्वजों की महिमा महान बखानी॥
सात पीढ़ी के पितर हमारे।
आशीष से जीवन उजियारे॥
पिता पितामह प्रपितामह।
वृद्ध प्रपितामह पूज्य सदाशय॥
माता पितामही प्रपितामही।
वृद्ध प्रपितामही सुखदायी॥
नाना नानी के पितर प्यारे।
मामा पक्ष के पूर्वज सारे॥
पितृलोक में वास तुम्हारा।
यमराज द्वार पर डेरा न्यारा॥
कृष्ण पक्ष की अमावस्या।
पितृ पक्ष पर्व अति मान्या॥
भाद्रपद मास पितृ पक्ष आवे।
श्राद्ध करत पितृ तृप्त हो जावे॥
सोलह दिन का पितृ पक्ष होवे।
पूर्णिमा से अमावस तक सोवे॥
तिथि अनुसार श्राद्ध कर्म करिये।
पितृ तिथि पर तर्पण धरिये॥
पिंडदान गया में करावे।
फल्गु नदी तट मुक्ति पावे॥
विष्णुपद मंदिर में पूजन।
अक्षयवट पर पिंड अर्पण॥
तिल और जौ से तर्पण होवे।
काले तिल से पितृ संतोषे॥
कुशा घास से तर्पण करिये।
दक्षिण दिशा की ओर मुख धरिये॥
ब्राह्मण भोजन अति पुण्यकारी।
पितृ तृप्ति का साधन भारी॥
गौ ग्रास कौवे को दीजै।
कुत्ते को भी रोटी दीजै॥
कौवा पितृ का दूत कहाया।
भोजन ग्रहण करे सुख पाया॥
पितृ दोष जो कुंडली में होवे।
श्राद्ध कर्म से शांति होवे॥
संतान हीनता का कारण।
पितृ दोष से होवे मारण॥
पितृ कृपा से संतान होवे।
वंश वृद्धि में बाधा खोवे॥
आर्थिक संकट जो घर आवे।
पितृ तर्पण से दूर हो जावे॥
अकाल मृत्यु का भय सतावे।
पितृ पूजन से सुरक्षा पावे॥
परिवार में कलह जो होवे।
पितृ शांति से सब सुख पावे॥
व्यापार में हानि जो आवे।
पितृ कृपा से लाभ कमावे॥
रोग व्याधि जो पीछा करे।
पितृ आशीष से आरोग्य भरे॥
मानसिक तनाव भय सतावे।
पितृ स्मरण से शांति पावे॥
स्वप्न में पितृ दर्शन देते।
आशीष और संदेश हमें देते॥
पितृ तृप्त तो देव प्रसन्ना।
सकल मनोरथ पूर्ण वासना॥
नारायण बलि गया में करावे।
त्रिपिंडी श्राद्ध से मुक्ति पावे॥
प्रयाग में भी श्राद्ध उत्तम।
त्रिवेणी संगम पर कर्म परम॥
हरिद्वार बद्रीनाथ धाम।
केदारनाथ में पितृ तर्पण काम॥
पुष्कर नासिक उज्जैन जाय।
पितृ श्राद्ध सब जगह हो पाय॥
रामेश्वरम में पिंड दान।
वाराणसी में अंतिम स्थान॥
अमावस्या को तर्पण करिये।
पितृ तिथि पर श्राद्ध धरिये॥
सर्वपितृ अमावस्या महान।
सब पितरों का एक समान॥
मातामह श्राद्ध नवमी को होवे।
नाना पक्ष की आत्मा तोषे॥
द्वादशी तिथि संन्यासी श्राद्ध।
चतुर्दशी अकाल मृत्यु बाध॥
पितृ पक्ष में मांस मदिरा त्यागो।
सात्विक भोजन से मन लागो॥
क्षमा प्रार्थना पितरों से करिये।
अनजाने अपराध क्षमा धरिये॥
पितृ चालीसा जो नित गावे।
पितृ कृपा से सर्वसुख पावे॥
जय जय पितृ देव भगवान।
करो कृपा दो शुभ वरदान॥
॥ दोहा ॥
पितृ चालीसा पढ़े जो कोय।
पितृ दोष से मुक्ति होय॥
संतान सुख वंश वृद्धि पावे।
पितृ कृपा जीवन महकावे॥
॥ ॐ पितृ देवाय नमः ॥
॥ इति श्री पितृ देव चालीसा समाप्त ॥