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॥ मंगल चालीसा ॥

Mangal Chalisa

॥ दोहा ॥

रक्त वर्ण रक्ताम्बर धर, शक्ति शूल धर नाम।

मंगल देव को प्रणाम करि, करो कृपा अभिराम॥

॥ चौपाई ॥

जय जय मंगल देव महान।

शक्ति साहस के निधान॥

जय भौम देव जय अंगारक।

शक्ति वीरता के तुम तारक॥

पृथ्वी माता के पुत्र कहाये।

भूमि पुत्र नाम जग में पाये॥

शिव जी के स्वेद से भी उत्पन्न।

रुद्र अंश तुम अति पावन॥

लोहितांग कुज आर नामा।

वक्र रिणाम्बर तुम परम धामा॥

रक्त वर्ण तन अति शोभा पावे।

लाल वस्त्र आभूषण भावे॥

चतुर्भुज में आयुध धारी।

त्रिशूल गदा शक्ति हितकारी॥

मेष वाहन पर तुम विराजो।

युद्ध क्षेत्र के देव तुम साजो॥

नवग्रह में सेनापति पद पायो।

शक्ति साहस का भंडार दिखायो॥

मेष वृश्चिक में होय निवासा।

भाई भूमि शक्ति का आसा॥

मंगलवार के तुम स्वामी देवा।

इस दिन करें सब तव सेवा॥

मूंगा रत्न तुम्हारा न्यारा।

तांबा लोहा धातु प्यारा॥

लाल वस्त्र मसूर दाल भोगो।

पूजन से सब संकट छोड़ो॥

मंगल दोष जो कुंडली में होवे।

मंगलवार व्रत से शांत होवे॥

मांगलिक दोष जो विवाह में आवे।

हनुमान पूजन से दूर हो जावे॥

भाई से कष्ट जो जीवन में होवे।

मंगल उपासना से शांत होवे॥

भूमि संबंधी विवाद जो आये।

मंगल पूजन से दूर हो जाये॥

साहस शक्ति वीरता दिलाओ।

कायरता को दूर भगाओ॥

क्रोध पर नियंत्रण दिलाओ माता।

शांत स्वभाव बनाओ विधाता॥

रक्त विकार से जो जन पीड़ित।

मंगल कृपा से होय संतुलित॥

चर्म रोग में भी लाभ मिलावे।

मंगल पूजन से आराम पावे॥

अग्नि दाह से जो जन घबराये।

मंगल शांति से सुख पाये॥

दुर्घटना भय जिसको सताये।

मंगल कृपा से रक्षा पाये॥

शत्रुओं पर विजय दिलाओ।

युद्ध में जय का वर पाओ॥

सेना पुलिस में नौकरी पावे।

मंगल कृपा से उन्नति आवे॥

खिलाड़ी को शक्ति दिलाओ।

प्रतियोगिता में विजय पाओ॥

सर्जन डॉक्टर को सफलता।

मंगल कृपा से मिले प्रखरता॥

इंजीनियर तकनीक में उन्नति।

मंगल आशीष से मिले प्रगति॥

मंगलवार को हनुमान पूजो।

मंगल दोष से कभी न झूझो॥

हनुमान जी मंगल के देवता।

दोनों की पूजा करो सेवता॥

लाल चंदन अर्पित करिये।

लाल पुष्प से पूजन करिये॥

मसूर दाल का दान करिये।

लाल वस्त्र भी दान धरिये॥

ॐ अं अंगारकाय नमः जपिये।

मंगल कृपा का फल पाइये॥

मंगलनाथ उज्जैन में जाओ।

मंगल दोष शांति का वर पाओ॥

बारह मंगलवार व्रत करिये।

मांगलिक दोष से मुक्त रहिये॥

तांबे के पात्र में जल भरिये।

उसमें गुड़ डाल पीपल सींचिये॥

मंगल ग्रह शांति हो जावे।

जीवन में सुख शांति छावे॥

मंगल चालीसा जो नित पढ़े।

शक्ति साहस में निश्चय बढ़े॥

मांगलिक दोष शांत हो जावे।

विवाह सुख निश्चय पावे॥

जय जय मंगल देव महान।

करो कृपा दो शुभ वरदान॥

॥ दोहा ॥

मंगल चालीसा पढ़े जो कोय।

शक्ति साहस वृद्धि होय॥

मांगलिक दोष शांत हो जावे।

जीवन में विजय सुख पावे॥


॥ ॐ अं अंगारकाय नमः ॥


॥ इति श्री मंगल चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री मंगल चालीसा के लाभ ॥

॥ मंगल उपासना विधि ॥

॥ मंगल मंत्र ॥

॥ मांगलिक दोष उपाय ॥