॥ दोहा ॥
जय महालक्ष्मी माता जय, विष्णुप्रिया भगवान।
अष्ट लक्ष्मी स्वरूपिणी, करो कृपा का दान॥
॥ चौपाई ॥
जय महालक्ष्मी जय जगदम्बा।
जय विष्णुप्रिया जय सुखदम्बा॥
जय जय नारायणी भवानी।
जय क्षीरसागर निवासिनी रानी॥
क्षीर सागर से तुम प्रकट भई।
समुद्र मंथन से जग में आई॥
देव दानव दोनों ललचाये।
विष्णु वक्षस्थल में तुम समाये॥
कमल पुष्प पर करो निवासा।
पद्मासना नाम जग में प्रकाशा॥
चतुर्भुज में शोभा न्यारी।
कमल गदा शंख चक्र धारी॥
अभय वरद मुद्रा सुखकारी।
स्वर्ण वर्षा करें हितकारी॥
गज राज द्वय करें अभिषेका।
स्वर्ण कलश से जल परिवेषा॥
लाल वस्त्र आभूषण धारो।
स्वर्ण मुकुट शिर शोभा बारो॥
विष्णु हृदय में करो विलासा।
वैकुण्ठ में है नित्य निवासा॥
शेषशय्या पर विष्णु विराजें।
चरण सेवा में लक्ष्मी साजें॥
अष्ट लक्ष्मी रूप तुम धारो।
भक्तन को सब सम्पदा बारो॥
आदि लक्ष्मी प्रथम रूप तुम्हारा।
मूल शक्ति का यह अवतारा॥
धान्य लक्ष्मी अन्न प्रदायिनी।
धरती की शस्य विधायिनी॥
धैर्य लक्ष्मी साहस दिलाओ।
कठिन समय में धीरज लाओ॥
गज लक्ष्मी ऐश्वर्य प्रदाता।
राज्य सम्पदा की तुम विधाता॥
संतान लक्ष्मी पुत्र दिलाओ।
वंश वृद्धि का सुख बरसाओ॥
विजय लक्ष्मी जय दिलवाओ।
शत्रुओं पर विजय कराओ॥
विद्या लक्ष्मी ज्ञान प्रदायिनी।
कला कौशल की तुम दायिनी॥
धन लक्ष्मी सम्पत्ति बढ़ाओ।
स्वर्ण रजत से घर भर जाओ॥
अष्ट लक्ष्मी का ध्यान लगाओ।
अष्ट सिद्धि नव निधि पाओ॥
महालक्ष्मी की महिमा अपारा।
वेद पुराण में है गुणगान सारा॥
राम जी के संग सीता बनी।
कृष्ण संग रुक्मिणी धनी॥
नृसिंह के संग लक्ष्मी आई।
वामन के संग पद्मा कहाई॥
हर अवतार में संग रहीं माता।
विष्णु शक्ति की तुम विधाता॥
कोलापुर में महालक्ष्मी धामा।
शक्तिपीठ में विराजे मामा॥
तिरुपति में पद्मावती कहाओ।
वेंकटेश संग पूजा पाओ॥
दीपावली में पूजन विशेषा।
धनतेरस को करें प्रवेशा॥
अमावस्या को लक्ष्मी पूजन।
घर घर में होता शुभ भोजन॥
शुक्रवार को व्रत जो करते।
लक्ष्मी कृपा से धन भरते॥
कमल पुष्प से पूजा करिये।
श्वेत और लाल फूल धरिये॥
घृत दीपक से आरती साजे।
धूप अगरबत्ती शोभा बाजे॥
खीर पूड़ी का भोग लगाओ।
मेवा मिठाई माता को खिलाओ॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै।
मंत्र जपो नित प्राप्त हो कृपा ऐ॥
श्री सूक्त का पाठ करिये।
लक्ष्मी कृपा का भोग करिये॥
जो जन लक्ष्मी को नित ध्यावे।
दरिद्रता दूर हो जावे॥
धन धान्य से घर भर जावे।
सुख सम्पत्ति नित बरसावे॥
महालक्ष्मी चालीसा जो पढ़े।
आर्थिक संकट से निश्चय छुड़े॥
ऋण से मुक्त जीवन हो जावे।
समृद्धि सुख शांति छा जावे॥
जय जय महालक्ष्मी भवानी।
जय विष्णुप्रिया जग कल्याणी॥
॥ दोहा ॥
महालक्ष्मी चालीसा पढ़े जो कोय।
धन धान्य समृद्धि होय॥
दरिद्रता दुख दूर हो जावे।
अष्ट लक्ष्मी कृपा बरसावे॥
॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये
प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
॥ इति श्री महालक्ष्मी चालीसा समाप्त ॥