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॥ श्री खाटू श्याम चालीसा ॥

Shri Khatu Shyam Chalisa

॥ दोहा ॥

श्री खाटू श्याम को प्रणाम, बाबा हारे का सहारा।

भक्तों के संकट हरो, करो कृपा अपारा॥

॥ चौपाई ॥

जय खाटू श्याम दया के सागर।

हारे के सहारे जग में नागर॥

जय बर्बरीक जय घटोत्कच नंदन।

जय भीम पौत्र जय जग वंदन॥

हिडिम्बा के पौत्र तुम प्यारे।

मोरवी माता के दुलारे॥

तीन बाण विजय के धारी।

त्रिलोक विजय शक्ति न्यारी॥

बाल्यकाल में तप किया भारी।

देवी ने वर दिया सुखकारी॥

तीन बाण से त्रिभुवन जीतो।

ऐसा वरदान देवी से लीतो॥

महाभारत में युद्ध करने आये।

कृष्ण ने ब्राह्मण रूप बनाये॥

पूछा किसके पक्ष में लड़ोगे।

कहा जो हारे उसके संग खड़ोगे॥

कृष्ण जाने धर्म हारेगा।

तुम्हारे संग अधर्म तारेगा॥

कृष्ण ने मांगा शीश दान।

दिया बर्बरीक ने निज प्राण॥

शीश काट कर दान में दिया।

परम त्याग का भाव लिया॥

कृष्ण ने दिया वरदान महान।

कलियुग में पूजे जग में जान॥

श्याम नाम से प्रसिद्ध होगे।

भक्तों के संकट हरण करोगे॥

खाटू नगर में शीश विराजे।

लाखों भक्त दर्शन को आजे॥

हारे का सहारा तुम कहलाये।

जो हारा वो तुमको ध्याये॥

दीन दुखी की सुनो पुकारा।

संकट में करो सब निस्तारा॥

फाल्गुन मास में मेला लागे।

लाखों भक्त दर्शन को जागे॥

द्वादशी एकादशी को आवें।

श्याम दर्शन कर सुख पावें॥

निशान यात्रा जग में न्यारी।

भक्तों की भीड़ अति भारी॥

रविवार को दरबार लागे।

भक्त सभी श्याम गुण गावे॥

जो श्याम नाम नित जपता।

संकट कोई उसको न तपता॥

व्यापार में जो हानि होवे।

श्याम भजे सो लाभ पावे॥

नौकरी में जो अटका होय।

श्याम कृपा से मिले सो होय॥

विवाह में जो बाधा आवे।

श्याम भजे वो शीघ्र हो जावे॥

संतान सुख जो न पा रहा।

श्याम कृपा से सुख लहा॥

कोर्ट कचहरी में जो फंसा।

श्याम भजे छूटे हर कसा॥

रोग व्याधि से जो जन पीड़ित।

श्याम कृपा से होय संतुलित॥

ऋण से जो जन है परेशान।

श्याम भजे मिटे अपमान॥

शत्रु से जो भय खाता है।

श्याम भजे विजय पाता है॥

परीक्षा में जो असफल होता।

श्याम भजे सफलता होता॥

गृह क्लेश जिसके घर होवे।

श्याम भजे सब शांत होवे॥

मनोकामना जो भी मन धरे।

श्याम कृपा से सब सिद्ध करे॥

निराश जन को आशा देते।

दुखी जनों को सुख सदा देते॥

हारे हुए को जीत दिलाते।

गिरे हुए को उठा के लाते॥

दाता दानी बाबा श्याम।

भक्तों को देते निज धाम॥

जय श्याम जय श्याम पुकारो।

संकट सारे दूर निकारो॥

खाटू धाम की जय जयकार।

बाबा श्याम की जय जयकार॥

श्याम चालीसा जो नित गावे।

मनवांछित फल शीघ्र ही पावे॥

संकट कटे मिटे भय पीरा।

जय जय श्याम बाबा बलवीरा॥

॥ दोहा ॥

खाटू श्याम चालीसा पढ़े जो कोय।

मनवांछित फल पावे संकट न होय॥

हारे के सहारे बाबा श्याम।

जय जय जय श्री खाटू श्याम॥


॥ बोलो श्याम बाबा की जय ॥


॥ इति श्री खाटू श्याम चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री खाटू श्याम चालीसा के लाभ ॥