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॥ केतु चालीसा ॥

Ketu Chalisa

॥ दोहा ॥

धूम्र वर्ण ध्वजाकार, केतु देव भगवान।

मोक्षदाता छाया ग्रह, करो कृपा का दान॥


राहु शीश तन केतु हो, अदभुत छवि गुणवान।

आध्यात्मिक उन्नति दाता, करहु भक्त कल्याण॥

॥ चौपाई ॥

जय जय केतु छाया ग्रह स्वामी।

मोक्ष प्रदाता अंतर्यामी॥

सिंहिका सुत विप्रचित्ति नंदन।

राहु अनुज तुम भक्त चंदन॥

समुद्र मंथन की कथा सुनाऊं।

केतु उत्पत्ति का भेद बताऊं॥

स्वर्भानु दानव अमृत पीना चाहे।

देव रूप धर देव पंक्ति में आये॥

सूर्य चंद्र ने भेद बताया।

विष्णु जी ने चक्र चलाया॥

शीश कटा पर अमृत पी लीना।

अमर हो गए दोनों ही तीना॥

शीश राहु धड़ केतु कहाये।

नवग्रह में दोनों स्थान पाये॥

धूम्र वर्ण तन ध्वजा समाना।

पुच्छल तारा जग में माना॥

द्विभुज रूप में शस्त्र विराजे।

गदा ध्वजा हाथों में साजे॥

गृद्ध वाहन पर तुम विराजो।

विचित्र रथ पर भी सवार साजो॥

छाया ग्रह तुम नवग्रह में गिने।

दक्षिण दिशा के स्वामी विने॥

मोक्ष मार्ग के तुम अधिकारी।

आध्यात्मिक उन्नति हितकारी॥

सूर्य ग्रहण के कारक स्वामी।

सूर्य को ग्रसो अंतर्यामी॥

वैराग्य ज्ञान के दाता देवा।

संन्यासी करते तव सेवा॥

लहसुनिया रत्न तुम्हारा प्यारा।

पंचधातु लोहा अति न्यारा॥

धूम्र भूरे वस्त्र सुहावे।

तिल उड़द का भोग लगावे॥

मंगलवार को पूजन करिये।

गणेश जी संग ध्यान धरिये॥

केतु दोष जो कुंडली में होवे।

केतु पूजन से शांति होवे॥

कालसर्प दोष में केतु पूजन।

राहु संग करें शांति अर्चन॥

संतान कष्ट जो होय घनेरा।

केतु कृपा से मिटे अंधेरा॥

पुत्र प्राप्ति की चाह मनावे।

केतु पूजन से संतान पावे॥

आध्यात्मिक मार्ग में बढ़ना चाहे।

केतु कृपा से मोक्ष पद पाये॥

ध्यान योग साधना में सिद्धि।

केतु आशीष से मिले समृद्धि॥

तंत्र मंत्र विद्या के ज्ञाता।

केतु देव हैं सिद्धि विधाता॥

गुप्त विद्या में रुचि हो जिसकी।

केतु कृपा से पूर्ण हो इच्छा किसकी॥

वैराग्य भाव जो मन में जागे।

केतु देव की कृपा से लागे॥

संसार से विरक्ति हो जावे।

केतु कृपा से मोक्ष पद पावे॥

अचानक दुर्घटना से बचावे।

केतु पूजन से सुरक्षा पावे॥

शल्य चिकित्सा में सफलता होवे।

केतु कृपा से आराम होवे॥

गुप्त रोग जो तन को सताये।

केतु पूजन से स्वास्थ्य पाये॥

मानसिक रोग भ्रम भटकाव।

केतु कृपा से मिटे दुराव॥

कुत्ते बिल्ली से भय होवे।

केतु शांति से दूर हो जोवे॥

नाना पक्ष से कष्ट होय जब।

केतु पूजन से शांति मिले तब॥

अनिष्ट ग्रह योग हो भारी।

केतु कृपा से कटे बिमारी॥

मंगलवार को व्रत धारण करिये।

भूरे धूम्र वस्त्र धारण करिये॥

गणेश पूजन संग केतु मनाओ।

तिल उड़द सप्तधान्य चढ़ाओ॥

ॐ कें केतवे नमः जपिये।

केतु कृपा का फल पाइये॥

लहसुनिया चांदी में जड़ाओ।

मध्यमा अंगुली में धारण कराओ॥

श्वान को रोटी नित खिलाओ।

मछली को आटा डालो जल में जाओ॥

केतु चालीसा जो नित गावे।

मोक्ष मार्ग की सिद्धि पावे॥

जय जय केतु देव भगवान।

करो कृपा दो शुभ वरदान॥

॥ दोहा ॥

केतु चालीसा पढ़े जो कोय।

मोक्ष मार्ग में उन्नति होय॥

संतान सुख आध्यात्म बढ़े।

केतु कृपा से जीवन चढ़े॥


॥ ॐ कें केतवे नमः ॥


॥ इति श्री केतु चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री केतु चालीसा के लाभ ॥

॥ केतु उपासना विधि ॥

॥ केतु मंत्र ॥

॥ केतु ग्रह जानकारी ॥

॥ केतु दोष के लक्षण ॥

॥ केतु और राहु में अंतर ॥