॥ दोहा ॥
माता काली जय जगत, जय महाकाली माय।
भक्तन के संकट हरो, करो कृपा की छाय॥
॥ चौपाई ॥
जय जय महाकाली जगदम्बा।
जय जय काली जय सुखदम्बा॥
जय जय भद्रकाली भयहारी।
जय जय चामुण्डा असुर संहारी॥
श्याम वर्ण अति उग्र स्वरूपा।
रक्त नयन अति भयंकर रूपा॥
मुण्डमाल गल शोभा पावे।
रक्त वस्त्र तन अति छवि छावे॥
खड्ग खप्पर कर में धारी।
वरद अभय मुद्रा सुखकारी॥
लाल जिह्वा मुख से लटकाये।
असुर रक्त पान को ललचाये॥
खुले केश चारों ओर फैले।
भयंकर रूप देख शत्रु थैले॥
शिव शरीर पर चरण धरे माँ।
रण में शत्रुन को करे फना॥
दुर्गा रूप से प्रकट भई माता।
चण्ड मुण्ड वध करने आता॥
रक्तबीज को तुमने मारा।
एक एक बूंद पिया अपारा॥
शुम्भ निशुम्भ का किया विनाशा।
देवन के मन दिया हुलासा॥
महिषासुर को तुमने मारा।
देव लोक का संकट टारा॥
दानव दैत्य सभी भय खाते।
तुम्हरो नाम सुनत घबराते॥
काल से काल महाकाली माता।
काल को भी काल तुम विधाता॥
दक्षिण काली कालिका कहाओ।
श्मशान काली भी नाम पाओ॥
भद्रकाली चामुण्डा माता।
सिद्ध काली जगत विधाता॥
गुह्य काली महाकाली नामा।
रक्षा काली करो सुकामा॥
कालरात्रि में पूजन होवे।
नवरात्रि में भक्त मन भोवे॥
अमावस्या को पूजन करिये।
मध्य रात्रि में ध्यान धरिये॥
शनिवार को पूजा करते।
मंगलवार को भक्त तरते॥
तांत्रिक साधना में मुख्य देवी।
शक्ति साधना की माता श्रेष्ठ सेवी॥
दस महाविद्या में प्रथम तुम्हारी।
आदि शक्ति तुम जगत उपकारी॥
कलकत्ता में काली घाट प्रसिद्धा।
दक्षिणेश्वर मंदिर अति सिद्धा॥
रामकृष्ण परमहंस ने सेवा।
विवेकानंद को दर्शन देवा॥
तारापीठ में माता विराजे।
कामाख्या में शक्ति साजे॥
जो भक्त तुम्हें मन से पुकारे।
संकट सारे उसके टारे॥
शत्रु नाश तुम शीघ्र करो माँ।
बुरी नजर से रक्षा करो माँ॥
भूत प्रेत पिशाच भगाओ।
तंत्र मंत्र का प्रभाव मिटाओ॥
काला जादू टोना टोटका।
सब कुछ तोड़ो न रहे रोटका॥
ऊपरी बाधा दूर करो माँ।
नकारात्मक शक्ति हरो माँ॥
रोग व्याधि से मुक्ति दिलाओ।
निरोगी काया हमें बनाओ॥
भय आतंक से मुक्ति पाऊं।
निर्भय होकर जीवन बिताऊं॥
शत्रुओं पर विजय दिलाओ।
कोर्ट कचहरी में जय पाओ॥
व्यापार में हानि न होवे।
धन समृद्धि घर में रोवे॥
परिवार की रक्षा करो माता।
सुख शांति का वरदान हो दाता॥
क्रोध से रक्षा करो माँ मेरी।
मन में शांति भरो माँ मेरी॥
दुष्टों का संहार करो माँ।
सज्जनों का उद्धार करो माँ॥
काली चालीसा जो नित पढ़े।
भय संकट कभी न उसको लड़े॥
शत्रु परास्त सब हो जावे।
माता काली कृपा छा जावे॥
जय जय महाकाली भवानी।
जय जय आदि शक्ति महा रानी॥
॥ दोहा ॥
काली चालीसा पढ़े जो कोय।
भय संकट न ताको होय॥
शत्रु नाश सब विघ्न विनाशे।
माता काली कृपा प्रकाशे॥
॥ ॐ क्रीं कालिकायै नमः ॥
॥ इति श्री काली चालीसा समाप्त ॥