← मुख्य पृष्ठ

॥ गुरु चालीसा ॥

Guru Chalisa

॥ दोहा ॥

देव गुरु बृहस्पति, ज्ञान दाता भगवान।

पीत वस्त्र पीत रत्न धर, करो कृपा का दान॥

॥ चौपाई ॥

जय जय गुरु देवेश्वर स्वामी।

जग उपकारक ज्ञान निधान॥

जय बृहस्पति देव महाराज।

देवों के गुरु तुम सदा सहाय॥

अंगिरा ऋषि के तुम पुत्र कहाये।

वेद शास्त्र के ज्ञाता सुहाये॥

पीत वर्ण पीत वस्त्र विराजे।

कमल आसन पर सुशोभित साजे॥

चतुर्भुज धारी सुंदर देवा।

कमंडल वरद भक्तन सेवा॥

दण्ड कमंडल माला धारी।

ज्ञान मुद्रा सोभा अति भारी॥

सफेद हाथी वाहन तुम्हारा।

ऐरावत नाम सुखकारी न्यारा॥

गुरुवार के तुम स्वामी देवा।

इस दिन करें सब तव सेवा॥

पुष्य नक्षत्र में होत अधिकारा।

धनु मीन राशि में निवास तुम्हारा॥

कर्क राशि में तुम उच्च कहाये।

मकर में नीच गुरुवर मन भाये॥

पुखराज रत्न तुम्हारा प्यारा।

स्वर्ण धातु अति उत्तम न्यारा॥

केसर चंदन अति प्रिय लागे।

पीत वस्तु से पूजन सुहागे॥

चना दाल गुड़ केला चढ़ाओ।

पीला मिष्ठान भोग लगाओ॥

देवताओं के तुम गुरु ज्ञानी।

विद्या बुद्धि के तुम अभिमानी॥

तारा नाम पत्नी तुम्हारी।

सात पुत्र की लीला प्यारी॥

ज्ञान विवेक धर्म के दाता।

सुख समृद्धि तुम देत विधाता॥

गुरु दोष जो कुंडली में होवे।

गुरुवार व्रत से शांत होवे॥

संतान सुख की चाह लगाये।

गुरु कृपा से सुत सुख पाये॥

विवाह में जो विघ्न बधाई।

गुरु पूजन से दूर हो जाई॥

विद्या में जो बुद्धि चाहे।

गुरु आराधन से सब पाये॥

धन वैभव संपत्ति बढ़ावे।

गुरु कृपा से सुख पावे॥

उच्च शिक्षा में जो रुचि राखे।

गुरुदेव कृपा से सफलता पाखे॥

अध्यापक और गुरु का सम्मान।

गुरुदेव से पावे वरदान॥

न्याय धर्म की रक्षा करो।

पाप अधर्म को दूर करो॥

पिता पुत्र के बीच बनावे।

प्रेम सौहार्द सुख लावे॥

गुरु शिष्य का रिश्ता सुहाना।

गुरुदेव से मिले ज्ञान खजाना॥

मोटापा रोग यकृत की पीड़ा।

गुरु पूजन से मिटे सभी बाधा॥

मधुमेह रोग से जो पीड़ित होवे।

गुरु कृपा से आराम होवे॥

पीलिया रोग हो जिसको होवे।

गुरु उपासना से ठीक होवे॥

धन की कमी जो जीवन में आये।

गुरु पूजन से धन बढ़ जाये॥

भाग्य वृद्धि की चाह लगावे।

गुरुदेव आशीष से भाग्य जगावे॥

न्यायाधीश वकील अफसर।

गुरु कृपा पावे मनवर॥

बैंकर और वित्तीय सलाहकार।

गुरु आशीष से हो विजयकार॥

धार्मिक कार्य में जो लगा होवे।

गुरुदेव आशीष फल पावे॥

गुरुवार को व्रत धारण करिये।

पीत वस्त्र धारण करिये॥

केला गुड़ चना दाल चढ़ाओ।

पीला मिष्ठान भोग लगाओ॥

ॐ ब्रीं बृहस्पतये नमः जपिये।

गुरु कृपा का फल पाइये॥

पुखराज रत्न स्वर्ण में जड़ाओ।

तर्जनी अंगुली में धारण कराओ॥

केसर तिलक लगाओ माथे।

हल्दी चंदन साथ में साथे॥

गुरु ग्रह शांति हवन करावे।

ब्राह्मण भोजन से सुख पावे॥

गुरु चालीसा जो नित पढ़े।

ज्ञान वैभव में निश्चय बढ़े॥

जय जय गुरु देव भगवान।

करो कृपा दो शुभ वरदान॥

॥ दोहा ॥

गुरु चालीसा पढ़े जो कोय।

संतान धन विद्या सुख होय॥

भाग्य वृद्धि सम्मान बढ़े।

गुरु कृपा से जीवन चढ़े॥


॥ ॐ ब्रीं बृहस्पतये नमः ॥


॥ इति श्री गुरु चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री गुरु चालीसा के लाभ ॥

॥ गुरु उपासना विधि ॥

॥ गुरु मंत्र ॥

॥ गुरु ग्रह जानकारी ॥