॥ गायत्री मंत्र ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
॥ दोहा ॥
जय गायत्री माता जय, वेद माता भगवान।
ज्ञान प्रकाश प्रदायिनी, करो कृपा का दान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गायत्री माता।
जय वेद माता जगत विधाता॥
जय जय त्रिपदा त्रिसंध्या रानी।
जय सावित्री जग कल्याणी॥
ब्रह्मा जी की शक्ति पुनीता।
तुम हो जगत जननी सीता॥
पंचमुखी तुम शोभा पाओ।
दस भुजा में आयुध धारो॥
मुक्ता मणि की माला राजे।
कमंडल पुस्तक कर में साजे॥
अभय वरद मुद्रा सुखकारी।
कमल शंख चक्र त्रिशूल धारी॥
श्वेत वस्त्र शोभा अति न्यारी।
हंस वाहन पर सवारी प्यारी॥
स्वर्ण किरीट मस्तक पर राजे।
दिव्य प्रभा से जग उजियाजे॥
वेदों की तुम माता कहाओ।
चारों वेदों में समाओ॥
ऋग्वेद यजुर्वेद प्रकाशी।
सामवेद अथर्ववेद निवासी॥
तीन लोक में व्याप्त तुम्हारी।
भूलोक भुवः स्वर्ग अधिकारी॥
त्रिकाल संध्या में पूजन होवे।
प्रातः मध्याह्न सायं मन भोवे॥
ब्रह्म मुहूर्त में जो जन जागे।
गायत्री जपते पाप सब भागे॥
सूर्य देव से संबंध तुम्हारा।
सविता का तुम तेज निहारा॥
चौबीस अक्षर मंत्र महाना।
चौबीस शक्ति का तुम निधाना॥
गायत्री जप से पाप कट जावे।
पुण्य प्रभाव मन में छा जावे॥
ज्ञान प्रकाश मन में भर दो।
अज्ञान तिमिर को दूर कर दो॥
बुद्धि विवेक हमें प्रदान करो।
सद्बुद्धि का वरदान करो॥
धी शक्ति को प्रेरित करो माँ।
सन्मार्ग पर हमें चलाओ माँ॥
मोह माया से मुक्त कराओ।
सत्य ज्ञान का मार्ग दिखाओ॥
ब्रह्मवर्चस तुम से ही पाऊं।
आत्म तेज को मैं बढ़ाऊं॥
यज्ञोपवीत धारी जो होवे।
गायत्री उसके हृदय में रोवे॥
उपनयन संस्कार में आती।
द्विज जन को तुम दीक्षा पाती॥
गायत्री मंत्र जपे जो प्राणी।
पावे मुक्ति बने गुणखानी॥
एक लाख जप अनुष्ठान करिये।
मनोकामना सिद्ध कर लीजिये॥
हवन करे गायत्री मंत्र से।
पावन होवे घर जन तंत्र से॥
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज धामा।
हरिद्वार में विराजे गायत्री मामा॥
पं श्रीराम शर्मा आचार्य।
गायत्री प्रचार किया अति कार्य॥
विद्यार्थी जो गायत्री जपते।
परीक्षा में वे सफल निकलते॥
बुद्धि तीव्र हो स्मरण शक्ति बढ़े।
ज्ञान विज्ञान में आगे बढ़े॥
रोग व्याधि से मुक्ति मिलावे।
गायत्री जप आरोग्य बढ़ावे॥
मानसिक शांति प्रदान करो माँ।
चिंता भय से मुक्त करो माँ॥
आत्मबल और मनोबल बढ़ाओ।
जीवन में उत्साह जगाओ॥
सात्विक जीवन की प्रेरणा दो।
धर्म कर्म में मन की एकता दो॥
परिवार में सुख शांति बनाओ।
पति पत्नी में प्रेम बढ़ाओ॥
संतान को सुबुद्धि प्रदान करो।
सदाचार का वरदान करो॥
गायत्री चालीसा जो गावे।
ज्ञान प्रकाश निश्चय पावे॥
सद्बुद्धि विवेक मन में आवे।
जीवन सफल हो मुक्ति पावे॥
जय जय गायत्री माता भवानी।
जय वेद माता जगत कल्याणी॥
॥ दोहा ॥
गायत्री चालीसा पढ़े जो कोय।
ज्ञान प्रकाश मन में होय॥
सद्बुद्धि विवेक प्राप्त करे।
जीवन सफल सुखी मन धरे॥
॥ ॐ भूर्भुवः स्वः ॥
॥ इति श्री गायत्री चालीसा समाप्त ॥