॥ दोहा ॥
जय जय गंगा माता जय, पाप विनाशिनी देव।
त्रिपथगामिनी मोक्षदा, करो कृपा अभि सेव॥
॥ चौपाई ॥
जय जय गंगा माता भवानी।
जय सुरसरि जय मोक्षदानी॥
जय त्रिपथगामिनी पापहारी।
जय भागीरथी जग उपकारी॥
विष्णु चरणों से तुम प्रकट भई।
ब्रह्मा जी के कमंडल में गई॥
वामन अवतार में विष्णु आये।
बलि के यज्ञ में पग फैलाये॥
त्रिविक्रम रूप धर ब्रह्मांड नापा।
चरण धोई ब्रह्मा ने जल आपा॥
विष्णुपदी नाम तब से पायो।
स्वर्ग लोक में वास बनायो॥
सगर राजा के साठ सहस्र पुत्र।
कपिल मुनि के श्राप से हुए मुक्त सूत्र॥
भस्म हो गये सगर के बेटे।
मुक्ति हेतु प्रयास रहे लेटे॥
अंशुमान और दिलीप ने तप किया।
किंतु गंगा को धरा न लिया॥
भगीरथ ने कठोर तप धारा।
ब्रह्मा जी ने दिया वर सारा॥
गंगा उतरें धरती पर आई।
शिव जी से विनती करो भाई॥
गंगा का वेग महा प्रचंड।
शिव जी ने धारा जटा में खंड॥
जटाशंकरी नाम यहाँ पायो।
शिव जटा से धरा पर आयो॥
भगीरथ के पीछे पीछे आई।
भागीरथी नाम से जग में गाई॥
जह्नु मुनि ने पी गई सारी।
कान से निकली नाम जाह्नवी धारी॥
सागर पुत्रों को मोक्ष दिलायो।
पाताल लोक तक धार पहुँचायो॥
त्रिपथगामिनी नाम सुहावे।
स्वर्ग भूमि पाताल में जावे॥
गंगोत्री में उद्गम स्थाना।
हिमालय से निकले जल माना॥
देवप्रयाग में भागीरथी मिले।
अलकनंदा संग गंगा बने विले॥
हरिद्वार में गंगा मैदान में आई।
हर की पौड़ी आरती सुहाई॥
प्रयागराज में त्रिवेणी संगम।
गंगा यमुना सरस्वती अनुपम॥
काशी में गंगा अति पावन।
मणिकर्णिका घाट मोक्षदा भावन॥
गंगासागर में समुद्र मिलाप।
पुण्य स्नान से कटें पाप ताप॥
गंगा जल से पवित्र न कोई।
सदा निर्मल कभी न सड़े सोई॥
गंगाजल घर में रखिये।
शुद्धि कार्य में सदा उपयोग कीजिये॥
मरणासन्न को गंगाजल पिलाओ।
मोक्ष मार्ग को प्रशस्त कराओ॥
अस्थि विसर्जन गंगा में होवे।
पितरों को मोक्ष मिले सोवे॥
गंगा स्नान से पाप कट जावे।
पुण्य फल मन में छा जावे॥
गंगा दशहरा पर्व मनाओ।
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को आओ॥
कार्तिक पूर्णिमा को स्नान करिये।
गंगा माता का ध्यान धरिये॥
माघ मास में स्नान विशेष।
कुम्भ मेला में करें प्रवेश॥
प्रातः काल गंगा स्नान करिये।
सूर्य को अर्घ्य देकर तरिये॥
गंगा आरती संध्या में होवे।
हजारों दीप जल में खोवे॥
गंगा माता पापनाशिनी।
मोक्षदायिनी पुण्य विलासिनी॥
जो गंगा का ध्यान लगावे।
जन्म जन्म के पाप नशावे॥
गंगा नाम जपे जो कोई।
पापी भी पावन हो जोई॥
गंगा चालीसा नित जो पढ़े।
पाप ताप से निश्चय छुड़े॥
मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो जावे।
गंगा कृपा से सुख पावे॥
पितृ दोष शांत हो जावे।
पितरों को मोक्ष मिल जावे॥
जय जय गंगा माता भवानी।
जय मोक्षदायिनी जग कल्याणी॥
॥ दोहा ॥
गंगा चालीसा पढ़े जो कोय।
पाप विनाश पुण्य प्रकाश होय॥
मोक्ष मार्ग सुगम हो जावे।
गंगा माता कृपा बरसावे॥
॥ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
॥ इति श्री गंगा माता चालीसा समाप्त ॥