॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
॥ चौपाई ॥
जय गणपति गणराज विनायक।
ज्ञान प्रकाश सबहि सुख दायक॥
विघ्न विनाशन मंगल मूरति।
मोदक प्रिय जग सब की आरति॥
गज बदन हिम ऐसे सुन्दर।
सुर नर मुनि मन मोहित अंतर॥
अग जग जीवन के आधारा।
तुम्हरो यश सब जग में न्यारा॥
भाल रजत तिलक सुभ सोहे।
जिनके दर्शन मोहित मन होते॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर ओप निराला॥
सिन्दूरम तन रक्त वसन धारे।
नाना भाँति भूषण धारे॥
एक दन्त सुन्दर कर में शोभे।
सब मन मोहत दर्शन लोभे॥
कुंज विराजत दूज के चंदा।
एक दन्त कर मोदक सुन्दा॥
कुन्दन वरन चतुर्भुज धारी।
मूषक वाहन सोहत प्यारी॥
पार्वती सुत चरणन में लोले।
विघ्न विनाशक जगत सम्भाले॥
सबसे पहले जापो करता।
पहले पूजे शुभ सब करता॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अष्ट महासिद्धि देन करता॥
ऋद्धि सिद्धि के नायक स्वामी।
परम सुखद जग रक्षक नामी॥
विघ्न हरण सब दुःख निवारण।
जय जय जय जय गजानन वारण॥
सब को इष्ट देव गणराजा।
गौरी लाल है अगम दूजा॥
गणपति जी की जय हो जग में।
विघ्न हरण सब काज में॥
रिद्धि सिद्धि संग देव सदा रहें।
जो भी मांगें सो फल पाएं॥
मोदक लड्डू प्रिय आहारा।
पार्वती नंदन रक्षनहारा॥
प्रथम पूज्य देवों में साजे।
विघ्न विनाशन मंगल राजे॥
॥ दोहा ॥
जय जय जय श्री गणेश जी।
कृपा करो विघ्नेश जी॥
सब विघ्न हरो देव जी।
मंगल करो महेश जी॥