॥ आरती - १ ॥
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
सर्वांसी लोकप्रिय स्थावरांसी जंगमा।
नमो नमो गणपती नमो नम॥
आदिवन्दू प्रथम वन्दू सूर्य चंद्र विधातें।
पाहें रूप तुझें रूपे सकळ घडितें॥
सर्वांसी लोकप्रिय स्थावरांसी जंगमा।
नमो नमो गणपती नमो नम॥
जैसे निर्मले तोयें स्थिर कळ कमळाचें।
तैसे निर्मळ चित्त हें स्मरणें सद्गुरूजीचें॥
सर्वांसी लोकप्रिय स्थावरांसी जंगमा।
नमो नमो गणपती नमो नम॥
राजादि युक्त असो गृहिं येई जो कोणी।
तो येतसे लवलाहे प्रेमाने आपुलिया॥
सर्वांसी लोकप्रिय स्थावरांसी जंगमा।
नमो नमो गणपती नमो नम॥
संतांचे ठायी वागे दानादि हें कडे।
गुणशीलाचे अंगी शोभती साधुकडे॥
सर्वांसी लोकप्रिय स्थावरांसी जंगमा।
नमो नमो गणपती नमो नम॥
ऐसे अनेक गुण तुझे गणेशा म्हणे।
गुणशीलाचे अंगे शोभती साधुकडे॥
सर्वांसी लोकप्रिय स्थावरांसी जंगमा।
नमो नमो गणपती नमो नम॥
॥ आरती - २ ॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
॥ आरती - ३ ॥
जय गणपति वंदन, श्री गणपति वंदन
जय गणपति वंदन, श्री गणपति वंदन।
आये हैं द्वार तुम्हारे, करो कृपा महाराज॥
प्रथम तुझे पूजा, सब जगत में होत।
बिन पूजे तुम्हारे, कोई काज न होत॥
प्रणवो पार्वती को तनुज, गौरी के लाल।
शिव शंभू के चितलायें, सब जग पालनहार॥
सिंदूर लेप तन शोहे, महावर राजत।
नाग फणी पद अंग में, तन में मदमात॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे तिलक बिराजत, मूसे की सवारी॥
मोदक से भोग लगावत, संत करें सेवकाई।
अगरू धूप दीप से, आरती उतारत भाई॥
जय गणेश देवा, जय गणेश देवा।
श्री गणेश देवा जय जय गणपति देवा॥
॥ आरती - ४ ॥
वक्रतुंड महाकाय
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गजाननं भूतगणादि सेवितं,
कपित्थ जंबू फलसार भक्षितम्।
उमासुतं शोक विनाश कारकं,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥
एकदन्तं महाकायं लम्बोदर गजाननम्।
विघ्ननाशं करं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥
॥ समापन प्रार्थना ॥
गणपति बप्पा मोरया।
मंगल मूर्ति मोरया॥
पुढच्या वर्षी लवकर या।
गणपति बप्पा मोरया॥
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ इति श्री गणेश आरती संपूर्ण ॥