॥ दोहा ॥
श्वेत वर्ण शीतल किरण, चंद्र देव भगवान।
मन के कारक देव हो, करो कृपा का दान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय चंद्र देव सुखकारी।
शीतल किरण शांति हितकारी॥
जय सोम देव जय शशि भगवान।
निशा पति तुम करो कल्याण॥
अत्रि ऋषि और अनुसूया से जन्मे।
अमृत अंश तुम जग में गन्मे॥
समुद्र मंथन से भी प्रकटे।
शिव जी के शिर पर विराजे॥
सोम शशांक निशाकर नामा।
इंदु हिमांशु तुम परम धामा॥
सुधाकर राकेश मृगांक कहाये।
कुमुदनाथ नाम से जग में छाये॥
श्वेत वर्ण तन अति शोभा पावे।
श्वेत वस्त्र आभूषण भावे॥
दस अश्व रथ पर तुम राजे।
श्वेत घोड़े संग सुशोभित साजे॥
हाथ में कमल गदा धारो।
भक्तन के संकट को टारो॥
सत्ताइस नक्षत्र पत्नी तुम्हारी।
दक्ष कन्याएं सब सुखकारी॥
रोहिणी प्रिय पत्नी कहाई।
अन्य पत्नियों ने दक्ष से लगाई॥
दक्ष श्राप से क्षय रोग भयो।
शिव की शरण में जाकर गयो॥
शिव जी ने शिर पर धारा।
क्षय से मुक्त किया तुम्हारा॥
कृष्ण पक्ष में घटते जाओ।
शुक्ल पक्ष में बढ़ते आओ॥
सोलह कला तुम्हारी न्यारी।
पूर्णिमा को पूर्ण शोभा भारी॥
बुध ग्रह तुम्हारे पुत्र कहाये।
तारा से इनको जन्म पाये॥
नवग्रह में तुम मंत्री पद पायो।
मन का कारक जग में गायो॥
कर्क राशि में होय निवासा।
माता मन जल के आसा॥
सोमवार के तुम स्वामी देवा।
इस दिन करें सब तव सेवा॥
मोती रत्न तुम्हारा प्यारा।
चांदी धातु है प्रिय न्यारा॥
श्वेत वस्त्र चावल दूध भोगो।
पूजन से सब संकट छोड़ो॥
चंद्र दोष जो कुंडली में होवे।
सोमवार व्रत से शांत होवे॥
मन अशांत जिसका रहे सदाई।
चंद्र पूजन से मिले भलाई॥
मानसिक रोग से जो जन पीड़ित।
चंद्र कृपा से होय संतुलित॥
तनाव चिंता से जो घबराये।
चंद्र ध्यान से शांति पाये॥
अनिद्रा से जो जन परेशान।
चंद्र पूजन से पावे निदान॥
माता से कष्ट जो जीवन में आये।
चंद्र उपासना से दूर हो जाये॥
जल संबंधी रोग में लाभ मिलावे।
कफ और श्वास में आराम पावे॥
स्त्रियों के रोग में विशेष लाभ।
चंद्र कृपा से मिले सब साध॥
पूर्णिमा को चंद्र दर्शन करिये।
सत्यनारायण व्रत भी धरिये॥
करवा चौथ में चंद्र पूजन।
पति की दीर्घायु हेतु भोजन॥
शरद पूर्णिमा को खीर रखिये।
चंद्र किरण में अमृत लखिये॥
शिव जी पर जल अभिषेक करिये।
चंद्र दोष का निवारण करिये॥
ॐ सों सोमाय नमः जपिये।
चंद्र कृपा का फल पाइये॥
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में जाओ।
चंद्र दोष शांति का वर पाओ॥
कलश में जल भरकर रखिये।
चंद्रमा की छाया में दखिये॥
प्रातः उस जल का सेवन करिये।
मानसिक शांति का अनुभव करिये॥
चंद्र चालीसा जो नित पढ़े।
मन की शांति निश्चय बढ़े॥
चंद्र दोष सब शांत हो जावे।
मानसिक सुख शांति छा जावे॥
जय जय चंद्र देव भगवान।
करो कृपा दो शुभ वरदान॥
॥ दोहा ॥
चंद्र चालीसा पढ़े जो कोय।
मन की शांति निश्चय होय॥
चंद्र दोष सब शांत हो जावे।
जीवन में सुख शांति छावे॥
॥ ॐ सों सोमाय नमः ॥
॥ इति श्री चंद्र देव चालीसा समाप्त ॥