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॥ बुध चालीसा ॥

Budh Chalisa

॥ दोहा ॥

हरित वर्ण हरित वस्त्र धर, बुध देव भगवान।

बुद्धि वाणी के देव हो, करो कृपा का दान॥

॥ चौपाई ॥

जय जय बुध देव गुणखानी।

बुद्धि विवेक के तुम अभिमानी॥

जय सौम्य देव जय ज्ञान निधान।

वाणी व्यापार के तुम भगवान॥

चंद्र देव के पुत्र कहाये।

तारा माता से जन्म पाये॥

बृहस्पति की पत्नी तारा।

चंद्र संग प्रेम प्रसंग न्यारा॥

इसी प्रसंग से तुम उत्पन्न।

ब्रह्मा जी ने किया पावन॥

सौम्य रौहिणेय इंदुज नामा।

ज्ञ बोधन तुम परम धामा॥

हरित वर्ण तन अति शोभा पावे।

हरे वस्त्र आभूषण भावे॥

चतुर्भुज में आयुध धारी।

खड्ग चर्म गदा पद्म हितकारी॥

सिंह वाहन पर तुम विराजो।

कहीं रथ पर भी सवार साजो॥

नवग्रह में युवराज कहाये।

बुद्धि वाणी के देव माने जाये॥

मिथुन कन्या में होय निवासा।

वाणी व्यापार बुद्धि का आसा॥

बुधवार के तुम स्वामी देवा।

इस दिन करें सब तव सेवा॥

पन्ना रत्न तुम्हारा न्यारा।

पीतल कांसा धातु प्यारा॥

हरे वस्त्र मूंग दाल भोगो।

पूजन से सब संकट छोड़ो॥

बुध दोष जो कुंडली में होवे।

बुधवार व्रत से शांत होवे॥

वाणी दोष जो जीवन में आवे।

बुध पूजन से दूर हो जावे॥

हकलाना तुतलाना मिटाओ।

वाणी में मधुरता दिलाओ॥

बुद्धि मंद जिसकी हो रही।

बुध कृपा से तीव्र हो सही॥

विद्यार्थी जो बुध को ध्यावे।

परीक्षा में सफलता पावे॥

स्मरण शक्ति को तीव्र कराओ।

एकाग्रता मन में जगाओ॥

व्यापार में जो लाभ चाहे।

बुध पूजन से सब कुछ पाये॥

लेखक पत्रकार को सफलता।

बुध कृपा से मिले प्रखरता॥

वकील को वाद में जीत मिलावे।

बुध आशीष से विजय पावे॥

गणित विज्ञान में जो बढ़ना चाहे।

बुध कृपा से सब कुछ पाये॥

कम्प्यूटर और तकनीक में उन्नति।

बुध पूजन से होवे प्रगति॥

संचार और मीडिया में काम।

बुध देव से मिले सुनाम॥

बैंकिंग वित्त में जो रुचि राखे।

बुध कृपा से सफलता पाखे॥

मामा से कष्ट जो जीवन में होवे।

बुध उपासना से शांत होवे॥

त्वचा रोग में भी लाभ मिलावे।

बुध पूजन से आराम पावे॥

नाड़ी तंत्र की समस्या होवे।

बुध कृपा से ठीक होवे॥

बुधवार को व्रत धारण करिये।

विष्णु गणेश की पूजा करिये॥

हरे वस्त्र हरे फूल चढ़ाओ।

मूंग दाल का भोग लगाओ॥

ॐ बुं बुधाय नमः जपिये।

बुध कृपा का फल पाइये॥

पन्ना रत्न सोने में जड़ाओ।

कनिष्ठा में धारण कराओ॥

बुध ग्रह शांति हवन करिये।

दुर्वा घास से आहुति धरिये॥

गणेश जी की पूजा भी करिये।

बुध और गणेश दोनों को भजिये॥

बुध चालीसा जो नित पढ़े।

बुद्धि वाणी में निश्चय बढ़े॥

व्यापार में लाभ होय अपारा।

बुध कृपा से जग में न्यारा॥

जय जय बुध देव भगवान।

करो कृपा दो शुभ वरदान॥

॥ दोहा ॥

बुध चालीसा पढ़े जो कोय।

बुद्धि वाणी में वृद्धि होय॥

व्यापार विद्या में उन्नति आवे।

बुध देव कृपा सुख पावे॥


॥ ॐ बुं बुधाय नमः ॥


॥ इति श्री बुध चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री बुध चालीसा के लाभ ॥

॥ बुध उपासना विधि ॥

॥ बुध मंत्र ॥

॥ बुध ग्रह जानकारी ॥