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॥ श्री बालाजी चालीसा ॥

Shri Balaji Chalisa

॥ दोहा ॥

श्री बालाजी महाराज को, करूं कोटि कोटि प्रणाम।

भूत प्रेत भय नाशकर, संकट हरो महान॥

॥ चौपाई ॥

जय बालाजी जय संकटमोचन।

भक्त वत्सल जय दुष्ट विलोचन॥

जय मेहंदीपुर के वासी।

जय जय प्रेत पिशाच विनाशी॥

हनुमान रूप तुम्हीं हो स्वामी।

अंतर्यामी सब के अंतर्यामी॥

मेहंदीपुर में धाम तुम्हारा।

भक्तन का तुम करो निस्तारा॥

प्रेतराज तुम कहलाते हो।

भूत प्रेत को दंड दिलाते हो॥

जो जन बाधा से पीड़ित होवे।

तुम्हरे दर्शन से मुक्त होवे॥

ऊपरी हवा जो किसी को लागे।

तुम्हरे दर पर आकर भागे॥

कोतवाल तुम प्रेत लोक के।

रक्षक भक्त सकल परलोक के॥

भैरव बाबा संग विराजे।

प्रेतराज कोतवाल साजे॥

तीनों देव एक संग होते।

भक्तन के दुख सब हर लेते॥

मंगलवार शनिवार आये।

भक्त दर्शन को धाये॥

अर्जी लेकर जो जन आवे।

मनवांछित फल शीघ्र ही पावे॥

प्रसाद लड्डू सब को दीजै।

भक्तन की मनोकामना पूरी कीजै॥

चोला चढ़ाये जो भक्त आये।

संकट सारे दूर हो जाये॥

ध्वजा लाल शोभा बढ़ाये।

मंदिर में जय जयकार छाये॥

जो पीड़ित बाधा से आवे।

पेशी होकर मुक्ति पावे॥

दरबार में बाधा निकाले।

बालाजी भक्तन को संभाले॥

काला जादू टोना टोटका।

सब कुछ टूटे न रहे रोटका॥

नजर दोष जो किसी को लागे।

बालाजी दर्शन से भागे॥

मानसिक रोग दूर हो जाये।

बालाजी कृपा जब आये॥

पागलपन उन्माद निवारण।

बालाजी करें भव पार करण॥

मिर्गी रोग से जो जन पीड़ित।

बालाजी करें उसे संतुलित॥

जो बच्चा रोये रात को भारी।

बालाजी करें रक्षा न्यारी॥

गृह क्लेश जहां हो घर में।

बालाजी शांति करें पल में॥

व्यापार में जो हानि हो रही।

बालाजी कृपा से लाभ बही॥

शत्रु परेशान जो करते होय।

बालाजी भजे न डर कोय॥

कोर्ट कचहरी में जो फंसा।

बालाजी भजे न रहे कसा॥

विवाह में बाधा जो आवे।

बालाजी कृपा से दूर हो जावे॥

संतान सुख जो न पा रहे।

बालाजी कृपा से सुख लहे॥

नौकरी में जो अटका होवे।

बालाजी भजे शीघ्र पावे॥

परीक्षा में जो असफल होते।

बालाजी भजे विजय होते॥

आलस्य प्रमाद जो सताये।

बालाजी ध्यान से दूर भगाये॥

निराशा हताशा मन में होय।

बालाजी भजे आशा रोय॥

बुरे विचार मन में आवे।

बालाजी जाप शुद्ध करावे॥

व्यसन से जो पीड़ित होवे।

बालाजी कृपा से मुक्त होवे॥

नशा छुड़ाये बालाजी महान।

नया जीवन दे करे कल्याण॥

जो श्रद्धा से दर पर आवे।

खाली हाथ कभी न जावे॥

अर्जी देकर जो जन जावे।

कार्य सिद्ध होकर फिर आवे॥

बालाजी चालीसा जो पढ़े।

भय संकट से कभी न लड़े॥

सुख शांति जीवन में पावे।

मंगल ही मंगल घर आवे॥

॥ दोहा ॥

बालाजी चालीसा पढ़े जो कोय।

भूत प्रेत बाधा न होय॥

संकट कटे विपद हर जाये।

बालाजी कृपा सुख पाये॥


॥ जय बालाजी की ॥


॥ इति श्री बालाजी चालीसा समाप्त ॥

॥ श्री बालाजी चालीसा के लाभ ॥